Description
पुष्प संख्या – 116
भाषा – *हिन्दी*
पृष्ठ संख्या – 220
पुस्तक आकार – 135×220mm
कवर – पेपरबैक
लेखक – *स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी*
संस्करण – तृतीय (सन् 2025)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*
इस ग्रन्थ में पूज्य पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य महाभाग ने हिन्दुधर्मको सनातन वैदिक आर्य धर्म सिद्ध किया है। तद्वत् इसमें उन्होंने ‘हिन्दु’ और ‘हिन्दू’ शब्दकी प्राचीनता तथा प्रामाणिकतापर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला है और इस तथ्यको उद्भासित किया है कि सर्वहितप्रद अभ्युदय निःश्रेयसकर मानवोचित शीलका नाम हिन्दुधर्म है।
इसमें दार्शनिक, वैज्ञानिक तथा व्यवहारिक धरातलपर हिन्दुधर्मकी प्रमुख चौबीस विशेषताओंका प्रसन्न और गम्भीर विवेचन सन्निहित है। इसमें हिन्दुओंके सर्वविध उत्कर्षका आधिभौतिक, आध्यात्मिक और आधिदैविक दृष्टिसे सूत्रशैलीमें निरूपण किया गया है। इसमें वर्णाश्रमव्यवस्था और पर्यावरणका दार्शनिक तथा वैज्ञानिक स्वरूप अद्भुतशैलीमें चित्रित किया गया है। इसमें एकदेववाद और बहुदेववादका विवेचन एवं वास्तव विकासका विश्लेषण तथा वेदविहित विज्ञानका निरूपण विचित्रशैलीमें किया गया है।
इसमें भारत और भारतीय नारियोंकी महत्ता सनातनशैलीमें चित्रित की गयी है। इसमें सनातन वैदिक आर्य हिन्दुधर्मकी चौबीस विशेषताओंका चित्रण अनुपम शैलीमें किया गया है। इसमें भारतका ऋग्वेदसम्मत नाम ‘सप्तसिन्धु’, ‘सिन्धु’ अर्थात् ‘हिन्दु’ सिद्ध किया गया है तथा हिन्दुधर्मके अवान्तरप्रभेदपर मार्मिक प्रकाश डाला गया है; तद्वत् सर्व देश, सर्व काल और सर्व परिस्थितिमें सबके लिये सनातन वैदिक – आर्य – हिन्दु धर्मकी अमोघ उपयोगितापर दिव्य दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।







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