Description

पुष्प संख्या – 128
भाषा – *हिन्दी*
कुल पृष्ठ – 52
पुस्तक आकार – 120×180mm
कवर – पेपरबैक
लेखक – *धर्मसम्राट् स्वामिश्री करपात्री जी*
संस्करण – द्वितीय (सन् 2025)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*

“नास्तिक भी आस्तिक” नामक यह ग्रन्थ स्वस्तिप्रकाशन संस्थान – श्रीगोवर्द्धनमठ – पुरीपीठका १२८वाँ पुष्प है। इसमें यह सिद्ध किया गया है कि अनीश्वरवादी नास्तिककी भी वाञ्छाका वास्तव विषय वेद – वेदान्तसम्मत अनन्त सच्चिदानन्दस्वरूप सर्वेश्वर ही है। कारण यह है कि प्रत्येक प्राणी मृत्युविहीन अमृतस्वरूप सत्, जडता – अज्ञताविहीन अखण्ड विज्ञानस्वरूप चित्, दैहिक – दैविक – भौतिक तापविहीन अलुप्त आनन्द; तद्वत् परतन्त्रताविहीन परम स्वतन्त्र तथा प्रभुतासम्पन्न सर्वनियामक होना चाहता है। जिस प्रकार प्यासके विषय पानीका, भूखके विषय भोजनका, श्रोत्रके विषय शब्दका, त्वक् के विषय स्पर्शका, नेत्रके विषय रूपका, रसनेन्द्रियके विषय रसका तथा नासिकाके विषय गन्धका अस्तित्व अवश्य है; उसी प्रकार जीवकी चाहके विषय सच्चिदानन्दस्वरूप सर्वेश्वरका अस्तित्व अवश्य है। वह शरीरादिके सदृश अयोगास्पद, संयोगास्पद और वियोगास्पद भी नहीं है; अपितु जल या जलदेवकी चाहके विषय जलके सदृश स्वरूपभूत साक्षात् प्रत्यगात्मा अन्तरात्मा ही है।

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