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सुखमय जीवनका सनातन सिद्धान्त

20.00

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Description

पुष्प संख्या – 9
भाषा – *हिन्दी*
कुल पृष्ठ – 52
पुस्तक आकार – 109×140mm
कवर – पेपरबैक
लेखक – *स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी*
संस्करण – द्वितीय (सन् 2024)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*

दैवयोगसे ५ मई १९९९ को दिल्लीमें ‘केण्टरवरी चर्चविशिप-इंगलेण्ड’ और १९९८ में ‘विश्वबैंक’ द्वारा संस्थापित ‘वर्ल्ड-फेथ्स-डेवलप्मेंट-डाइलोग’ की प्रतिनिधि ‘कु० वेन्डी टाइण्डले’ से सायं छहसे रात्रि आठतक विश्वमें व्याप्त निर्धनता और अराजकता आदिके निवारणकी भावनासे विविध विषयों पर वार्ता हुई । इस सन्दर्भ में विश्वबैंकसे प्रकाशित तीन पुस्तकोंकी विषयवस्तुकी जानकारी भी प्राप्त की गयी। तत्पश्चात् वाशिंगटनमें सभावित सम्मेलनमें पुरीनरेश श्रीश्रीगजपति – दिव्यसिंहदेवजीकी प्रेरणासे उन्हींके माध्यमसे उक्त आशयसे जो सन्देश भेजा गया, उसी को ‘सुखमयजीवनका सनातनसिद्धान्त’ नामसे प्रकाशित किया जा रहा है।
इस पुस्तिकामें धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, और वेदकी परिभाषाका; पूर्वजन्म- पुनर्जन्म – सिद्धान्त, पर्यावरणसिद्धान्त, सुखाभिव्यक्तिसिद्धान्त, निर्धनता-उन्मूलन, स्त्रीमाहात्म्य, हिन्दुसंघटन और विप्लवकारी विघटन एवं सुखमयजीवनका सरल-सरस-शास्त्रसम्मत- सर्वहितकारी स्वरूप गुम्फित किया गया है।

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