Description
पुष्प संख्या – 48
भाषा – *हिन्दी*
पृष्ठ संख्या – 192
पुस्तक आकार – 135×215mm
कवर – पेपरबैक
रचयिता – *स्वामी निरञ्जनदेव तीर्थ जी*
संस्करण – द्वितीय (सन् 2026)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*
ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय-गोवर्द्धनमठ-पुरीके १४४वें पूज्यपाद श्रीमज्जगद्गुरु-शङ्कराचार्य श्रीनिरञ्जनदेवतीर्थजीमहाभाग कोलकाता, मुम्बई, चुरु, दिल्ली आदि विविध क्षेत्रोंमें चातुर्मास्यव्रत पूर्ण करते थे। आषाढ़ शुक्ल १५ से भाद्रशुक्ल चतुर्दशी-पर्यन्त गुरुतत्त्व, ईश्वरतत्त्व, माया, धर्म, विविध पर्व-त्योहार, द्रौपदी-चरित, सावित्री-चरित, नलोपाख्यान आदि विषयोंपर उनका सरल, सरस, शास्त्रसम्मत और युक्तियुक्त प्रवचन अद्भुत आकर्षक होता था।
पूज्यपाद वर्तमान श्रीमज्जगद्गुरु-शङ्कराचार्य स्वामी निश्चलानन्दसरस्वतीजी उक्त स्थलोंपर उनके प्रवचन सुनने और उनसे ब्रह्मसूत्रादि वेदान्तग्रन्थोंका अध्ययन करने जाया करते थे। उन्होंने उसी सन्दर्भ में पूज्यपाद स्वामी श्रीमज्जगद्गुरु-शङ्कराचार्य निरञ्जनदेवतीर्थजीमहाराजके प्रवचनोंको लिपिबद्ध किया था। प्रसङ्गानुसार कतिपय प्रमाणोंको समुद्धृत कर लेखमालाको उन्हें दिखाया भी था।
*’स्वस्तिप्रकाशनसंस्थान’* से गुरुतत्त्व, भगवत्तत्त्व, अवतारतत्त्व, ईश्वरसिद्धि और ईश्वरसाक्षात्कारपरक उन निबन्धोंको *’प्रवचनपीयूष’* नामसे प्रकाशित किया जा रहा है।












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