Description

पुष्प संख्या – 122
भाषा – *हिन्दी*
कुल पृष्ठ – 184
पुस्तक आकार – 135×220mm
कवर – पेपरबैक
संस्करण – द्वितीय (सन् 2025)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*

पूज्यपाद श्रीगोवर्द्धनमठ – पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु- शङ्कराचार्य स्वामी निश्चलानन्दसरस्वती महाभागके द्वारा विरचित *”वेद-विमर्श”* नामक इस ग्रन्थ के अध्ययन और अनुशीलनसे वेदोंके सार्वभौम स्वरूपका बोध और उनमें अद्भुत आस्थाका उदय सुनिश्चित है । प्रमाण, प्रमेय, प्रमा और अप्रमेय चारों स्तरपर वेदोंके स्वरूपका प्रतिपादन इस ग्रन्थकी अपूर्वता है । वेदविमुख जीवनकी सार्थकता सर्वथा असम्भव है। वैदिक कर्म, उपासना तथा ज्ञानके विलोपसे सम्भावित विश्व नरक और नारकीय प्राणियोंका समुदाय ही सिद्ध हो सकता है । चतुर्दशभुवनात्मक ब्रह्माण्डमें आधिभौतिक, आध्यात्मिक और आधिदैविक धरातलपर जो कुछ दिव्यता है; उसका एकमात्र रहस्य वैदिक कर्म, उपासना तथा ज्ञानका समादर है । अत: अपने अधिकारकी सीमामें वेदमार्गका अनुगमन अवश्य कर्त्तव्य है ।

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