Description
पुष्प संख्या – 35
भाषा – *हिन्दी*
कुल पृष्ठ – 44
पुस्तक आकार – 120×180mm
कवर – पेपरबैक
लेखक – *स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी*
संस्करण – द्वितीय (सन् 2024)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*
सनातनियोंके प्रशस्त मानविन्दुओंपर योजनाबद्ध प्रहार पाश्चात्यप्रेरित भारतीय शासनतन्त्रका उपहार बन चुका है। गोवंश, ब्राह्मण, वेद और वैदिक वाङ्मय, सती, सत्यवादी, निर्लोभ, दानशील, देववाणी, देवालय, गङ्गा, मानसरोवरादि दिव्य जलस्रोत, विन्ध्य – हिमालयादि पर्वत हमारे प्रशस्त मानविन्दु हैं। वर्णधर्म, आश्रमधर्म, एकात्मवाद हमारे उदात्त सिद्धान्त हैं। इनपर कुठाराघात हिन्दुओंके अस्तित्व और आदर्शपर प्रहार है। इस राकेट, कम्प्यूटर और एटमके युगमें भी हिन्दुओंके प्रशस्त मानविन्दुओंका महत्त्व विश्वविदित है। हिन्दुओंके हृदय में ही अपने प्रशस्त मानविन्दुओंके प्रति घोर अनास्था – हमारी ज्वलन्त समस्या है।
‘तत्त्वपक्षपातो हि स्वभावो धियाम्’ – ‘तत्त्वका पक्षपात बुद्धिका स्वभाव है’, इस तथ्य में आस्थाके बलपर सत्यसहिष्णुताकी क्रमिक अभिव्यक्तिकी भावनासे पावन सन्देश के माध्यमसे सनातनसिद्धान्तोंकी सार्वभौम दार्शनिकता, वैज्ञानिकता और व्यावहारिक धरातलपर अद्भुत उपयोगितापर प्रकाश डाला है। अतएव पुस्तककी उपयोगिता स्वतः सिद्ध है।






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